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धरहरि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धरहरि पु † ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'धरहर ^२' । उ॰—(क) जो पहिले अपुने सिर परई । सो का काहु कै धरहरि करई ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ २५७ । (ख) जब जमजाल पसार परैगो हरि विनु कौन करैगी धरहरि ।—सूर (शब्द॰) ।

धरहरि ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ धैर्य?] दृढ़ विश्वास । निश्चय । उ॰—जम करि मुँह तरहरि परयौ इहि धरहरि चित लाउ । विषयतृषा परिहरि अजौ नरहरि के गुन गाउ ।—बिहारी (शब्द॰) ।