धर्मभिक्षुक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धर्मभिक्षुक संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह जिसने धर्मार्थ भिक्षावृत्ति ग्रहण की ही । विशेष—मनु ने नो प्रकार के धर्मभिक्षुक गिनाएँ हैं—पुत्र की कामना से विवाह चाहनेवाला; यज्ञ की इच्छा रखनेवाला; पथिक; जो यज्ञ में अपना सर्वस्व लगाकर निर्धन हो गया हो; गुरु माता और पिता के भरणपोषण के लिये धन चाहनेवाला; अध्ययन की इच्छा रखनेवाला विद्यार्थी और रोगी । ये नव धर्मभिक्षुक ब्राह्मण श्रेष्ठ स्नातक हैं । इन्हें यज्ञ की वेदी के भीतर बैठाकर दक्षिणा के सहित अन्नदान देना चाहिए । इनके अतिरिक्त जो ओर ब्राह्मण हों उन्हें वेदी के बाहर बैठाना चाहिए ।