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धर्ममेघ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धर्ममेघ संज्ञा पुं॰ [सं॰] योग में असंप्रज्ञात समाधि के अंतर्गत एक समाधि जिसमें वैराग्य के अभ्यास से चित्त सब वृत्तियों से रहित हो जाता है अर्थात इतना असमर्थ हो जाता है, कि उसका रहना न रहना बराबर हो जाता है, केवल कुछ संस्कार मात्र रह जाता है ।