धर्मराजपरीक्षा
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धर्मराजपरीक्षा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] स्मृतियों के अनुसार धर्म में अभि- युक्त दोषी है या निर्दोष, इसकी एक दिव्य परीक्षा । विशेष— बृहस्पति, पितामह आदि स्मृतिकारों ने जो विधान लिखे हैं वे थोडे़ बहुत भिन्न होने पर भी वस्तुतः एक ही से हैं । धर्म और अधर्म की दो श्वेत और कृष्ण मूर्तियाँ भोजपत्र पर बनाकर औऱ उनकी प्राण प्रतिष्ठापूर्वक पूजा करके मिट्टौ के दे बराबर पिंड़ों में उन्हें रखे । फिर दोनों पिंड़ों को दो नए घड़ों में रखकर अभियुक्त को बुलावे और किसी घडे़ पर हाथ रखने के लिये कहे । यदि उसका हाथ धर्मपिंडवाले घडे़ पर पडे़ तो उसे निर्दोष समझे ।