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धर्मविपर्यय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धर्मविपर्यय संज्ञा पुं॰ [सं॰] धर्मपरिवर्तन । उ॰— अकबर के पूर्व मुसलमानों के जो आक्रमण हुए थे उनमें मूर्तियों के खडन, अनेक अनाचार तथा अत्याचार, धर्मविपर्यय आदि के दृश्यों ने जनता में अवतारवाद के विरुद्ध भावना भर दो ।— अकबरी॰ (भू॰), पृ॰ ३ ।