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धर्मस्थ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धर्मस्थ संज्ञा पुं॰ [सं॰] धर्माध्यक्ष । न्यायाधीश । विशेष— भारतीय आर्यों में लोक को व्यवस्थित करनेवाले नियम जिनका पालन राज्य करता था, धर्म ही कहलाते थे । कानून भी धर्म कहलाते थे । कानून धर्म से अलग नहीं माना जाता था ।