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धसक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धसक ^१ संज्ञा स्त्री॰ [अनु॰]

१. ठन ठन शब्द जो सूखी खाँसी में गले से निकलता है ।

२. सूखी खाँसी । ढसक ।

धसक ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ धसकना]

१. किसी के लाभ या बढ़ती को देख दुःख से दब जाने की वृत्ति । डाह । ईर्ष्या ।

धसक ^३ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ धसकना]

१. धसकने की क्रिया या भाव ।

२. डर । भय । दहशत । जैसे,— उनके मन में कुछ धसक बैठ गई ।