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धसकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धसकना ^१ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ धँसना]

१. नीचे को धंस जाना । नीचे को खसक जाना । दब जाना । बैठ जाना । उ॰— (क) दीखत पंडू रेत में नए खोज या द्वार । आगे उठि पाछे धसकि रहे नितंबन भार ।—लक्ष्मणसिंह (शब्द॰) । (ख) तजो धीर दरनि धरनिधर धसकत धराधर धीर भार सहि न सकतु है ।— तुलसी (शब्द॰) ।

२. किसी का लाभ या बढती देख दुःख से दबना । डाह करना । ईर्ष्या करना ।

धसकना ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ धँसना] मन में भय उत्पन्न होना । जी दहलना । उ॰—गवनचार पदमावति सुना । उठा धसकि जिउ औ सिर धुना ।— जायसी (शब्द॰) ।