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धापना

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शब्दसागर

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धापना पु ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ तर्पण?] संतृष्ट होना । तृप्त होने । अघाना । जो भरना । उ॰—(क) लंपट धूत पूत दमरी को विषय जाप को जापी । भक्ष अभक्ष अपेय पान करि कबहुँ न मनसा धापी ।—सूर (शब्द॰) ।(ख) दूतन कह्यो बड़ी यह पापी । इन तो पाप किए हैं धापी ।—सूर (शब्द॰) । (ग) कबिरा ओंधी खोपड़ी कबहूँ धापे नाहि ।—तीन लोक की संपदा कबै घर माँहि ।—कबीर (शब्द॰) ।

धापना ^२ क्रि॰ स॰ संतुष्ट करना । तृप्त करना ।

धापना ^३ क्रि॰ अ॰ [सं॰ धावन?] दौड़ना । भागना । जल्दी जल्दी चलना । उ॰— द्रुमन चढ़े सब सखा पुकारत मधुर सुनावहु बैन । जनि घापहुँ बलि चरन मनोहर कठिन काँट मग ऐन ।—सूर (शब्द॰) ।