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धारि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धारि पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ धारा]

१. दे॰ 'धार' ।

२. समूह । झुंड़ । उ॰— (क) धावो धावो धरो सुनि धाए जातुधान वरिधार उते दे जलद ज्यों नसावनी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) रामकृपा अवरेब सुधारी । विवुध धारि भइ गुनद गोहरी ।—तुलसी (शब्द॰) ।

३. एक वर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में एक रगण ओर एक लघु होता है । जैसे,— री लखौ न । जात कौन । वस्त्र हारि । मौन धारि ।