धुन्धु
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धुंधु संज्ञा पुं॰ [सं॰ धुन्धु] एक राक्षम का नाम जो मधु राक्षस का पुत्र था । विशेष— हरिवंश में लिखा है कि धुंधु एक बार मरुभूमि में बालू कै नीचे छिपकर संसार को नष्ट करने की कामना से कठिन तपस्या कर रहा था । वह जब साँस लेता था तब उसके साथ धुँआ और अंगारो निकलेत थे, भूकंप होता था और बडे़ बडे़ पहाड तक हिलने लगते थे । जब महाराज बृहदश्व वानप्रस्थ ग्रहण करके और अपना राज्य अपने लड़के कुवलयाश्व को देकर वन की ओर जाने लगे तब महर्षि उतंक ने जाकर उनसे धुंध की शिकायत की और कहा कि यदि आप इस दुष्ट राक्षस को न मारेंगे तो बड़ा अनर्थ हो जायगा । बृहदश्व ने कहा कि मैं तो वानप्रस्थ ग्रहण कर चुका हूँ और अब अस्त्र नहीं उठा सकता । हाँ, मेरा लड़का कुवलयाश्व उसे अवश्य मार डालेगा । तदनुसार कुवलयाश्व अपने सौ लड़कों को लेकर उतंक के साथ घुंघु को मारने चला । उस समय विष्णु ने भी लोकहित के विचार से उसके शरीर में प्रवेश किया था । कुवयाश्व और उसके ल़डकों को देखकर धुंधु क्रोध में फुफकार छोड़ने लगा जिससे कुवलयाश्व के ९७ लड़के मारे गए । अंत में कुवलयाश्व ने उसे मार डाला । तभी से कुवलयाश्व का नाम धुंधुमार पड़ गया ।