धूतना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धूतना पु ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ धूत] धूर्तता करना । धोखा देना । ठगना । उ॰—(क) हों तेरे ही संग जरौंगी थह कहि त्रिया धूति धन खायो ।—सूर (शब्द॰) । (ख) सत्य वचन मानस विमल कपट रहित करतूति । तुलसी रघुबर सेवकहिं सकै न कलियुग धूति ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) तुम गलानि जिय जनि करहु समुझि मातु करतूति । तात कैकइहि दोष नहिं गई गिरा मति धूति ।—तुलसी (शब्द॰) ।
धूतना पु ^२ वि॰ वंचना करनेवाली । छलनेवाली । उ॰—इनके वेष मात्र पूतना । महापापिनी जगत धूतना ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २७३ ।