धूतपापा
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धूतपापा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] काशी की एक पुरानी छोटी नदी या नाला जिसके विषय में कहा जाता है कि वह पंचगंगा के पास गंगा में मिलती थी । यह नदी अब पट गई है । विशेष—काशीखंड में इसके महात्म्य के संबंध में एक कथा है । पूर्व काल में वेदशिरा नामक एक ऋषि वन में तपस्या कर रहे ते । उस वन में शुचि नाम की एक अप्सरा को देख मुनि ने कामातुर होकर उसके साथ संभोग किया । संभोग से धूतपापा नाम की कन्या उत्पन्न हुई । पिता की आज्ञा से वह कन्या घोर तप करने लगी । अंत में ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर उसे वर दिया तू संसार में सबसे पवित्र होगी, तेरे रोम रोंम में सब तीर्थ निवास करेंगे । एक दिन धूतपापा को अकेले देख धर्म नामक एक मुनि उससे विवाह करने के लिये कहने लगे । धूतपापा ने पिता की आज्ञा लेने के लिये कहा । पर धर्म बार- बार उसी समय गाँधर्व विवाह करने का हठ करने लगे । इस पर धूतपापा ने क्रुद्ध होकर शाप दिया, 'तुम जड़ नद होकर बहो' । धर्म ने धूतपापा को शाप दिया', तुम पत्थर हो जाओ' । पिता ने जब यह वृतांत सुना तब कन्या से कहा, 'अच्छा तू काशी में चंद्रकांत नाम की शिला होगी । चंद्रोदय होने पर तुम्हारा शरीर द्रवीभूत होकर नदी के रूप में बहेगा और तुम अत्यंत पवित्र होगी । उसी स्थान पर धर्म भी धर्मनद होकर बहेगा और तुम्हारा पति होगा । महाभारत (भीष्म पर्व ९ अ॰) में भी धूतपापा नाम की एक नदी का उल्लेख है पर कुछ विवरण नहीं है । इससे कह नही जा सकता कि इसी नदी से अभिप्राय है या किसी दूसरी से ।