धूनी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धूनी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ धूई]
१. गुग्गुल, लोबान आदि गंधद्रव्यों या और किसी वस्तु को जलाकर उठाया हुआ धुआँ । धूनी । धूप । मुहा॰—धूनी देना = गंध मिश्रित या विशेष प्रकार का धुआँ उठाना या पहुँचाना । जैसे, इसे मिर्चों की धूनी दो तो भूत छोड़ेगा ।
२. वह आग जिसे साधु या तो ठंढ से बचने के लिये अथवा शरीर को तपाने या कष्ट पहुँचाने के लिये अपने सामने जलाए रहते हैं । साधुओं के तापने की आग । उ॰—विहरागिन धूनी चारों ओर लगाई ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ४५९ । मुहा॰—धूनी जगना या लगना = (साधुओं के पास की) (१) आग जलना । (२) शरीर तपाना । तप करना । (३) साधु होना । विरक्त होना । योगी होना । धूनी रमाना = (१) सामने आग जलाकर शरीर तपाने बैठना । तप करना । (२) साधु हो जाना । विरक्त हो जाना । घर बार छोड़ देना ।
धूनी पु ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'धुनिया' । उ॰—रजं मोद बंकी करक्की कमानं । धुनै तूल धूनी मनो कट्ठ यानं ।—पृ॰ रा॰, १२ ।३१६ ।