धैना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]धैना ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ धरना] पकड़ना । उ॰—बिहतर कद्दू होय संत से नइ कै चलिए । जुरै सो आगै धरै गोड़ धै सेवा करिए ।-पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ ५३ । यौ॰—धै मै = पकड़ पकड़कर । उ॰—मँदिल सून पिउ अनतै बसा । सेल नागिनी धै धै डसा ।—जायसी ग्रं॰ (गुप्त), पृ॰ ३५६ ।
धैना पु † ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ धरना या धंधा]
१. पकड़ी हुई टेव । आदत । स्वभाव । उ॰—कह गिरधर कबिराय फूहर के याही धैना । कजरौटा नहिं होइ लुकाठै आँजै नैना ।-गिरिधर (शब्द॰) ।
२. काम धंधा ।