धोना

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हिन्दी[सम्पादन]

क्रिया[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

धोना क्रि॰ स॰ [सं॰ धावन] पानी डालकर किसी वस्तु पर से मैल गर्द आदि हटाना । पानी से साफ करना । जल से स्वच्छ करना । प्रक्षालित करना । पखारना । विशेष—जिस वस्तु पर से गर्द मैल आदि हटाई जाती है तथा जो लगी हुई वस्तू (गर्द मैल आदि) हटाई या छुड़ाई जाती है, दोनों का प्रयोग कर्म में होता है । जैसे, हाथ धोना, कपड़ा धोना, घर धोना, बरतन धोना । इसी प्रकार मैल धोना, कालिख धोना, रंग धोना इत्यादि । उ॰—(क) जिन एहि बारि न मानस धोए । ते कायर कलिकाल विगोए ।—तुलसी (शब्ज॰) । (ख) सूरदास हरि कुपा बारि सों कलिमल धोय बहावै ।—सूर (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—डालना ।—देना ।—लेना । मुहा॰—(किसी वस्तु से) हाथ धोना = खो देना । गँवा देना । वंचित रहना । जैसे,—जो कुछ उनके पास था वे उससे भी हाथ धो बैठे । हाथ धोकर पीछे पड़ना = सब काम धाम छोड़कर प्रवृत्त होना । सब छोड़कर लब जाना । धोवा धाया = (१) निष्कलंक । निर्दोष । साफ । (२) ऐसा मनुष्य जो बुराई करके भी औरों के सामने उसी प्रकार लज्जिल न हो जिस प्रकार निर्दोष आदमी /?/

२. दूर करना । हटाना । मिटाना । उ॰—(क) करी गोपाल की सब होय । जो अपने पुरुषारथ मानत अति झूठो है सोय । साधन मंत्र, यंत्र, उद्यम, बल यह सब डारौ धोय । जो कछु लिखि राखी नँदानँदन मेटि सकै नहिं कोय ।—सूर (शब्द॰) । (ख) तू ने शकुंतला के अपमान का दुख सब धो दिया है ।— लक्ष्मणसिंह (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—डालना । मुहा॰—धो बहाना = न रहने देना । छोड़ देना या खो देना ।

धोना ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ वपन, प्रा॰ खथण, ववण]

१. बीज को जमने के लिये जुते खेत या भुरभुरी की हुई जमीन में छितराना । किसी दाने या फल के बीज को इसलिये मिट्टी में डालना जिसमें उसमें से अंकुर फूटे और पौधा उत्पन्न हो । संयो॰ क्रि॰—डालना ।—देना ।—लेना ।

२. बिखराना । छितराना । इधर उधर डालना । उ॰—जान बूझकर धोखा खाना है यह कौन शऊर । आम कहाँ से खाओगे जब बोते गए बबर ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ५५२ ।