सामग्री पर जाएँ

धोरी

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

धोरी संज्ञा पुं॰ [सं॰ धौरेय]

१. धुरे को उठानेवाला । भार उठानेवाला । उ॰—(क) फेरत मनहिं मातुकृत खोरी । चलत भगति बल धीरज धोरी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) तिन महँ प्रथम । रेख जग मोरी । धिग धरमध्वज धंधक धोरी ।— तुलसी (शब्द॰) ।

२. बैल । वृषभ । उ॰—समरथ धोरी कंध धरि रथ ले और निबाहि । मारग माहिं न मेलि ए पीछहिं विरुद लजाहि ।—दादू (शब्द॰) ।

३. प्रधान । मुखिया । सरदार । उ॰—(क) मन मैं मंजु मनोरथ जोरी । सोहर गौरि प्रसाद एक तें कौसिक कृपा चौगुनी भोरी । कुअँर कुअँरि सब मंगल मूरति नृप दोउ धरम धुरंधर धोरी । राज समाज भूरि भागी जिन्ह चौगुन लाहु लही एहि ठौरी ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) अब यह फौज लूट ही लौजै । घोरिन घाउ न कोऊ कीजै ।—लाल (शब्द॰) ।

४. श्रेष्ठ पुरुष । बड़ा आदमी । उ॰—म्लेच्छ चमार चूहरे कोरी । तिनतें झरवावत द्विज घोरी ।—निश्चल (शब्द॰) ।