ध्रुवकेतु
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]ध्रुवकेतु संज्ञा पुं॰ [सं॰] बृहत्संहिता के अनुसार एक प्रकार का केतु तारा । विशेष— इस प्रकार के केतुओं का न तो आकार नियत है, न वर्ण या प्रमाण, यहाँ तक कि उनकी गति भी नियत या विचमित नहीं होती । देखने में वे स्निग्ध होते हैं और फलित ज्योतिष में इनके बीच भेद माने मए है, दिव्य, आंतरिक्ष और भोम । हलका फल भी अनियत है॰— कभी अच्छा, कभी कृत, कभी /?/ ।