सामग्री पर जाएँ

ध्वजभंग

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

ध्वजभंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ ध्वजभङ्ग] एक रोग जिसमें पुरूष की स्त्रीसंभोग की शक्ति नहीं रह जाती । कलीबता । नपुंसकता । विशेष—इस रोग में पुराषेंद्रिय की पोशियाँ ओर नाड़ियाँ शिथिल पड़ जाती है । चरक आदि आयुर्वेद के आचाय़ों के मता- नुसार यह रोग अम्ल, क्षार आदि के अधिक भोजन से दुष्ट योनि-गमन से, क्षत आदि लगने से, वीर्य के प्रतिरोध से तथा ऐसे हो ओर कारणों से होता है । भावप्रकाश में लिखा है कि संयोग के समय भय, शोक, क्रोध आदि का संचार होने से अनभिप्रेता या द्वेष रखनेवाली स्त्री के साथ गमन करने से मानस क्लैब्य उत्प्न्न होता है । यह रोग अधिकार अधिक शुक्रक्षय ओर इंद्रियचालन से उत्प्न्न होता है ।