सामग्री पर जाएँ

नटनारायण

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

नटनारायण संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक राग जो हनुमत के मत से मेघ राग का तीसरा पुत्र और भरत के मत से दीपक राग का पुत्र है । लेकिन सोमेश्वर और कल्लिनाथ के मत से यह छह रागों में से एक है और कामोदी, कल्याणी, आभीरी, नाटिका, सारंगी और नट हंबीरा ये छह इसकी रागिनियाँ हैं । विशेष—यह संपूर्ण जाति का एक राग हैं, इसमें सब शुद्ध स्वर लगते हैं और यह हेमंत ऋतु में रात के समय २१ दंड से २६ दंड तक गाया जाता है । कुछ लोग इसे मधुमाध, बिलावल के मेल से बान हुआ संकर राग भी मानते हैं । एक और शास्त्रकार के मत से यह षाड़व जाति का राग है । इसमें निषाद वर्जित है और यह बरसात में तीसरे पहर गाया गाया जाता है । उसके अनुसार बिलावल, कामोदी, सावेरी, सुहवी और सोरठ इसकी रागनियाँ और शुद्धनट, मेघनट, हम्मीरनट, सारंगनट, छायानट, कामोदनट, केदारनट, मेघनट, गौड़नट, भूपालनट, जयजयनट, शंकरनट, हीरनट, श्यामनट, वराड़ीनट, विभासनट, विहागनट, और शंकरा- भरणनट इसके पुत्र है । पर वास्तव में ये सब संकर राग हैं जो नट तथा भिन्न भिन्न रागों के मेल से बनते हैं ।