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नटसाल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नटसाल संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ नष्ट (=निरोहित) + शल्य] काँटे का वह भाग जो निकाल लिए जाने पर भी टूटकर शरीर के भीतर रह जाता है । उ॰—लगन जो हिए दुसार करि तऊ रहत नटसाल ।—बिहारी (शब्द॰) ।

२. बाण की गाँसी जो शरीर के भीतर रह जाय ।

३. फाँस जो बहुत छोटी होने के कारण नहीं निकाली जा सकती । उ॰— सालति है नटसाल सी क्यों हूँ निकसति नाहिं ।—बिहारी । (शब्द॰) ।

४. कसम । पीड़ा । ऐसी मानसिक व्यथा जो सदा तो न रहे पर समय समय पर किसी बात या मनुष्य के स्मरण से होती हो । उ॰—उठै सदा नटसाल सी सौतिन के उर सालि ।—बिहारी (शब्द॰) ।