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नरहरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नरहरी ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] एक छंद का नाम जिसके प्रत्येक पद में १४ और ५ के विराम से १९ माञाएँ और अंत में १ नगण १ गुरू होता है । जैसे,—हरि सुनत भक्त की बानी, दुख भरी । झट प्रगटे खंबा फारी, तिहि घरी । रिपु हन्यो दीन सुख भारी, दुख हरी । मन सदा भजौ चित लाई, नरहरी (शब्द॰) ।