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नराच

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नराच संज्ञा पुं॰ [सं॰ नाराच]

१. तीर । बाण । शर ।

२. पंच चामर या नागराज नामक वृत्त जिसके प्रत्येक चरण में जगण, रगण, जगण, और अंत में एक गुरु होता है । जैसे,— जु रोज रोज गोप तीय कृष्ण संग धावतीं । सुगीत नाथ पाँव सों लगाय चित्त गावतीं ।