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नवरात्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नवरात्र संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. प्राचीन काल का नौ दिनों तक होनेवाला एक प्रकार का यज्ञ ।

२. चैत्र शुक्ला प्रतिपदा से नवमी तक और आश्र्विन शुक्ला प्रतिपदा से नवमी तक के नौ नौ दिन जिसमें लोग नवदुर्गा का व्रत, घटस्थापन तथा पूजन आदि करते हैं । विशेष—हिंदुओं में यह नियम है कि वे नवरात्र के पहले दिन घटस्थापन करते हैं और देवी का आवाहन तथा पूजन करते हैं । यह पूजन बराबर नौ दिनों तक होता रहता है । नवें दिन भगवती का विसर्जन होता है । कुछ लोग नवरात्र में व्रत भी करते हैं । घटस्थापन करनेवाले लोग अष्टमी या नवमी के दिन कुमारीभोजन भी करते हैं । कुमारी- भोजन में प्रायः नौ कुमारीयाँ होती हैं जिनकी अवस्था दो और दस वर्ष के बीच की होती है । इन नौ कुमारीयों के के कल्पित नाम भी हैं । जैसे,—कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, काली, चंडिका, शांभवी, दुर्गा और सुभद्रा । नवरात्र में नवदुर्गा में से नित्य क्रमशः एक एक दुर्गा के दर्शन करने का भी विधान है ।