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नवसप्त

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नवसप्त संज्ञा पुं॰ [सं॰] नौ और सात, सोलह श्रृंगार । क्रि॰ प्र॰—सजना, साजना = सोलहो श्रृंगार करना । उ॰— (क) चलि ल्याह सीतहिं सखी नादर सजि सुमंगल भामिनी ।

नवसप्त साजे सुंदरी सब मत कुंजर गामिनी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) जहँ तहँ जूथ मिलि भामिनि । सजि नवसप्त सकल दुति दामिनि ।—तुलसी (शब्द॰) ।