नहाना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

नहाना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ स्नान, प्रा॰ हाररण, बुंदे॰ हनाना]

१. पानी के स्रोत में, बहती हुई धार के नीचे या सिर पर से पानि ढालकर शरीर को स्वच्छ करने या उसकी शिथिलता दूर करने के लिये उसे धोना । स्नान करना । संयो॰ क्रि॰—डालना । मुहा॰—दूधों नहाना पूतों फलना = धन और परिवार से पूर्ण होना । (आशीर्वाद) । विशेष—शरीर में जितने रोमकूप हैं, नहाने से उन सबका मुँह खुल और साफ हो जाता है और शरीर की थकावट दूर हो जाती है । भारत सरीखे गरम देशों में लोग नित्य सबेरे उठकर शौच आदि से निवृत्त होकर नहाते हैं और कभी सबेरे और संध्या दोनों समय नहाते हैं । पर ठंढे देशों के लोग प्रायः नित्य नहीं नहाते, सप्तार में एक या दो बार नहाते हैं ।

२. रजोधर्म से निवृत्त होने पर स्त्री का स्नान करना ।

३. किसी तरल पदार्थ से सारे शरीर का आलुप्त हो जाना । शराबोर हो जाना । बिलकुल तर हो जाना । जैसे, पसीने से नहाना । खून से नहाना । विशेष—इस अर्थ में 'नहाना' शब्द के साथ प्रायः 'उठाना' या 'जाना' संयोज्य क्रिया लगाई जाती है ।

नहाना पु † ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰] नाधना । उ॰—सूरत निरत के बैल नहायन, जोत खेत निर्बानी । दुबिधा दूब छोलकर बाहर, बोया नाम की धानी ।—कबीर श॰, भा॰, पृ॰ ५१ ।