नागकेसर
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]नागकेसर ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ नागकेशर या नागकेसर] एक सीधा सदाबहार पेड जो देखने में बहुत सुंदर होता है । विशेष— यह द्विदल अंगुर से उत्पन्न होता है । पत्तियाँ इसकी बहुत पतली और घनी होती हैं, जिससे इसके नीचे बहुत अच्छी छाया रहती है । इसमें चार दलों के बडे़ और सफेद फूल गरमियों में लगते हैं जिनमें बहुत अच्छी महक होती है । लकड़ी इसकी इतनी कडी और मजबूत होती है कि काटनेवाले की कुल्हाडियों की धारें मुड मुड जाती है; इसी से इसे वज्रकाठ भी कहत हैं । फलों में दो या तीन बीज निकलते हैं । हिमालय के पूरबी भाग, पूरबी बंगाल, आसाम, बरमा, दक्षिण भारत, सिहल आदि में इसके पेड बहुतायत से मिलते हैं । नागकेसर के सूखे फूल औषध, मसाले और रंग बनाने के काम में आते हैं । इनके रंग से प्रायः रेशम रँगा जाता है । सिंहल में बीजों से गाढा, पीला तेल निकालते हैं, जो दीया जलाने और दवा के काम में आता है । मदरास में इस तेल को वातरोग में भी मलते हैं । इसकी लकड़ी से अनेक प्रकार के सामान बनते हैं । लकड़ी ऐसी अच्छी होती है कि केवल हाथ से रँगने से ही उसमें वरानिश की सी चमक आ जाती है । बैद्यक में नागकेसर कसेली, गरम, रुखी, हलकी तथा ज्वर, खुजली, दुर्गंध, कोढ, विष, प्यास, मतली और पसीने को दूर करनेवाली मानी जाती है । खूनी बवासीर में भी वैद्य लोग इसे देते हैं । इसे नागचंपा भी कहते हैं ।
नागकेसर ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का शुद्ध लोहा या फौलाद [को॰] ।