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नागवंश

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नागवंश संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. नोगों की कुलपरंपरा ।

२. शक जाती की शाखा । विशेष— प्राचीन काल में नागवंशियों का राज्य भारतवर्ष के कई स्थानों में तथा सिंहल में भी था । पुराणों में स्पष्ट लिखा है कि सात नागवंशी राजा मथुरा भोग करेंगे, उसके पीछे गुप्त राजाओं का राज्य होगा । नौ नाग राजाओं के जो पुराने सिक्के मिले हैं उनपर बृहस्पति नाग, देव नाग, गणपति नाग इत्यादि नाम मिलते हैं; ये नागगण विक्रम संवत् १५० और २५० के बीच राज्य करते थे । इन नव नागों की राजधानी कहाँ थी इसका ठीक पता नहीं है पर अधिकांश विद्वानों का मत यटही है कि उनकी राजधानी नरवर थी । मथुरा और भरतपुर से लेकर ग्वालियर और उज्जैन तक का भूभाग नागवंशियों के अधिकार में था । इतिहासों में यह बात प्रसिद्ध है कि महाप्रतापी गुप्तवंशी राजाओं ने शक या नागवंशियों को परास्त किया था । प्रयाग के किले के भीतर जो स्तंभ है उसमें स्पष्ट लिखा है कि महाराज समुद्रगुप्त ने गणपति नाग को पराजित किया था । इस गणपति नाग के सिक्के बहुत मिलते हैं । महाभारत में भी कई स्थानों पर नागों का उल्लेख है । पांडवों ने नागों के हाथ से मगध राज्य छीना था । खांडव वन जलाते समय भी बहुत से नाग नष्ट हुए थे । जनमेजय के सर्प यज्ञ का भई यही अभिप्राय मालूम होता है कि पुरुवंशी आर्य राजाओं से नागवंशी राजाओं का विरोध था । इस बात का समर्थन सिकंदर के समय के प्राप्त वृत्त से होता है । जिस समय सिकंदर भारवर्ष में आया उससे पहले पहल तक्षशिला का नागवंशी राजा ही मिला । उस राजा ने सिकंदर का कई दिनों तक तक्षशिला में आतिथ्य किया औ र अपने शत्रु पौरव राजा के विरुद्ध चढ़ाई करने में सहायता पहुँचाई । सिकंदर के साथियों ने तक्षशिला में राजा के यहाँ भारी भारी सर्प पले देखे थे जिनकी नित्य पूजा होती थी । यह शक या नाग जाति हिमालय के उस पार की थी । अब तक तिब्बती अपनी भाषा को नागभाषा कहते हैं ।