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नाज

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नाज † ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ अनाज]

१. अनाज । अन्न । उ॰— खलन को योग जहाँ नाज ही में देखियत माफ करबे ही माँह होत करनाशु है ।— गुमान (शब्द॰) । २ खाद्य द्रव्य । भोजन सामग्री । खाना । उ॰— तुलसी निहारि कपि भालु किलकत ललकत लखि ज्यों कँगाल पातरी सुनाज की ।— तुलसी (शब्द॰) । विशेष-दे॰ 'अनाज' ।

नाज ^२ संज्ञा पुं॰ [फा॰ नाज]

१. ठसक । नखरा । चोचला । हाव भाव । उ॰— अदा में नाज में चंचल अजब आलम दिखाती है । व सुमिरन मोतियों की उँगलियों में जब फिराती है ।— नचीर (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना । यौ॰—नाज अदा, नाज नखरा = (१) हावभाव । (२) चटक मटक । बनाव सिंगारा । मुहा॰— नाज उठाना = चोचला सहना । नाज से पालना = बडे़ लाड़ प्यार से पालना ।

२. घमंड़ । अभिमान । गर्व । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।