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नाटका

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नाटका देवदारु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ नाटक + देवदारु] एक छोटा पेड़ या झाड जो भारत के दक्षिण और लंका में मिलता है । विशेष— इसकी लकडी से एक प्रकार का तेल निकलता है जो नावों में लगाया जाता है । इस पेड के फल और पत्तियों में पाचन, स्वेदन और भेदन शक्तियाँ होती हैं । भारतवर्ष में इसकी पत्तियाँ और फल दुर्भिक्ष में खाए जाते हैं । और मिर्च के साथ लोग पत्तियों का शाक बनाकर भी खाते हैं ।