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नाटयोक्ति

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नाटयोक्ति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. वे विशेष विशेष संबोधन शब्द जो विशेष विशेष व्यक्तियों के लिये नाटकों में आते हैं । जैसे,— ब्राह्मण के लिये आर्य, क्षत्रिय के लिये महाराज, पति के लिये आर्यपुत्र, राजा के साले के लिये राष्ट्रीय, राजा के लिये देव, वेश्या के लिये अज्ज्का, कुमार के लिये युवराज, विद्वान् के लिये भाव ।

२. नाटयसंबंधी उक्ति । जैसे,— स्वगत, प्रकाश, अपवरहित, जनांतिक (को॰) ।