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नातर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नातर पु † अव्य॰ [हिं॰ नातरु]दे॰ 'नातरु' । उ॰— जातू विष्णु कहा सुन मोरा । नातर चक्षु हीन होय तोरा ।— कबीर सा॰, पृ॰ ६७ ।