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नादना

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शब्दसागर

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नादना पु ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ नदन या हिं॰ नाद] बजाना । उ॰— (क) काहू बीन गहा कर गाहू नाद मृदंग । सब दिन अनंद बधाबा रहस कूद इक संग । —जायसी (शब्द॰) । (ख) इन ही के आए ते बधाए ब्रज नित नए नादत बढ़त सब सब सुख जियो है ।— तुलसी (शब्द॰) ।

नादना ^२ क्रि॰ अ॰

१. बजना । शब्द करना । उ॰— शून्य ज्ञान सुषुप्ती होय । अकुलाहट सेना ही सोय ।— कबीर (शब्द॰) ।

२. चिल्लाना । गरजना । उ॰— मनु करि दल लखि वृद्ध हरि नादि उठयो कंदर निकर ।— गोपाल (शब्द॰) ।

नादना ^३ क्रि॰ अ॰ [सं॰ नन्दन] लहकना । लहलहाना । प्रफुल्लित होना । उ॰— नैकु न जानी परति यों परयो विरह तन माय । उठति दिया लौं नादि हरि लिए तिहारो नाम ।— बिहारी (शब्द॰) ।