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नाधना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नाधना क्रि॰ स॰ [सं॰ नद्ध ( = बँधा या जुडा हुआ)]

१. रस्सी या तस्मे के द्वारा बैल, घोडे़ आदि को उस वस्तु के साथ जोड़ना या बाँधना जिसे उन्हें खींचकर ले जाना होता है । जोतना । जैसे, बैल को गाडी या हल में नाधना । उ॰— (क) खसम बिनु तेली के बैल भयो । बैठत नाहिं साधु की सँगति नाधे जनम गयो । —कबीर (शब्द॰) । (ख) बहत वृषभ बहलन मँह नाधे । — रघुराज (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—देना । मुहा॰—काम में नाधना = काम में लगाना ।

२. जोडना । संबद्ध करना । उ॰— तुम्हें देखि पावै, सुख बहु भाँति ताहि दीजै नेकु निरखि नतीजा नेह नाधे को ।— कालिदास (शब्द॰) ।

३. गूँथना । गुहना । उ॰— देव जगामग जोतिन की, लर मोतिंन की लरकीन सों नाधी ।— देव (शब्द॰) ।

४. (किसी काम को) ठानना । अनुष्ठित करना । आरंभ करना । जैसे, काम नाधना । उपद्रव नाधना । उ॰— (क) मेरी कही न मानत राधे । ये अपनी मति समुझत नाहीं कुमति कहा पन नाधे । —सूर (शब्द॰) । (ख) याही को कहायो ब्रजराज दिन चार ही में करिहै उजियारी ब्रज ऐसी रीति नाधी है ।— मतिराम (शब्द॰) ।