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नारायणबलि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नारायणबलि संज्ञा पुं॰ [सं॰] आत्मघात द्वारा बुरी तरह से मरनेवाले पतित मृतक के प्रायश्चित्त के लिये एक बलिकर्म जो नारायण आदि पाँच देवताओं के उद्देश्य से किया जाता है । विशेष—आत्महत्या करनेवाले के और्ध्वदैहिक क्रिया नियमा- नुसार समय पर नहीं की जाती । मृत्यु के एक वर्ष पर नारायणबलि और पर्णनर दाह (फूस के पुतले का दाह) करके तब श्राद्धिदिक किए जाते हैं । आत्मघाती का जो दाह आदि करता है उसे भी प्रायश्चित करना चाहिए ।