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निंबादित्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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निंबादित्य संज्ञा पुं॰ [सं॰निम्बादित्य] निंबार्क संप्रादाय के आदि आचार्य । इनका दूसरा नाम 'अरुणि' भी था । ये श्री राधिका जो की कंकण के अवतार माने जाते हैं । विशेष— वृंदावन के पास ध्रुव नामक पहाड़ी पर ये रहते थे । वहीं पर इनके शष्यों ने इनकी गद्दी स्थापित की । कहते है, इनके पिता का नाम जगन्नाथ था । बाल्यावस्था में इनका नाम भास्कराचार्य था । बहुत से लोगे इन्हें सूर्य के अंश से उत्पन्न कहते थे । ये कृष्ण के बड़े भारी भक्त थे । इनके नाम के कारण इनके संबंध में एक विलक्षण कथा भक्तमाल में लिखी है । एक संन्यासी वा जैन यति इनसे दिन भर शास्त्रार्थ करता रहा । सूर्यास्त हो रहा था । इन्होंने उससे भोजन के लिये कहा । सुर्यास्त के उपरांत भोजन करने का नियम उसका नहीं था । इसपर निंबार्क ने सूर्य को रोक रखा । जबतक संन्यासी ने भोजन नहीं कर लिया तबतक सूर्य देवता एक नीम के पेड़ पर बैठे रहे ।