निकल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

निकल संज्ञा स्त्री॰ [अं॰] एक धातु जो सुरमे, कोयले, गंधक, संखिया आदि के साथ मिली हुई खानों में मिलती है । विशेष— साफ होने पर यह चाँदी की तरह चमकती है । यह बहुत कड़ी होती है और जल्दी गलती नहीं तथा लोहे की तरह चुंबक शक्ति को ग्रहण करती है । सन् १७५१ में एक जर्मन ने इसका पता लगाया । इसका साफ करना बहुत कठिन काम है । ताँबे के साथ मिलाने से यह विलायत ी चाँदी के रूप में ही जाती है । अलुमीनम के साथ इसे मिला देने से इसमें अधिक कड़ापन आ जाता है । यह धातु कंधार, राजपूताना तथा सिंहल द्वीप में थोड़ी बहुत मिलती है । काम मिलने के कारण इसका मूल्य कुछ अधिक होता है, इससे छोटे सिक्के बनाने के काम में यह लाई जाने लगी है ।