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निमाजबन्द

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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निमाजबंद संज्ञा पुं॰ [फा़॰ नमाजबंद] कुश्ती का एक पेच जिसमें जोड़ के दाहिनी ओर बैठकर उसकी दहिनी कलाई को अपने दहिने हाथ से खीचा जाता है और फिर अपना बायाँ पैर उसकी पीठ की ओर से लाकर उसकी दहिनी भुजा को इस प्रकार बाँध लिया जाता है कि वह चूतड़ के बीचोबीच आ जाती है । इसके बाद उसके दहिने अँगूठे को अपने दहिने हाथ से खींचते हुए बाँए हाथ से उसकी जाँघिया पकड़कर उसे उलटकर चित कर देते हैँ । विशेष—इस पेच के विषय में प्रसिद्ब है कि इसके आविष्कर्त्ता इसलामी मल्लविद्या के आचार्य अली साहब है । एक बार किसी जंगल में एक दैत्य से उन्हें मल्लयुद्ब करना पड़ा । उसे नीचे तो वे ले आए, पर चित करने के लिये समय न था, क्योंकि नमाज का समय बीत रहा था । इसलिये उन्होंने उसे इस प्रकार बाँधा कि उसे उसी स्थिति में रखते हुए नमाज पढ़ सकें । जब वे खड़े होते तब उसे भी खड़ा होना और जब बैठते या झुकते तब बैठना या झुकना पड़ता । यही इसका निमाजबंद नाम पड़ने का कारण है ।