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निरूद्ध

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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निरूद्ध ^१ वि॰ [सं॰]

१. रुका हुआ । बँधा हुआ । प्रतिबद्ब ।

२. जो रोका गया हो (को॰) ।

निरूद्ध ^२ संज्ञा पुं॰ योग में पाँच प्रकार की मनोवृत्तियों में से एक । चित्त की वह अवस्था जिसमें वह अपनी कारणीभूत प्रकृति को प्राप्त कर निश्चेष्ट हो जाता है । विशेष— मन की वृत्तियाँ योग में पाँच मानी गई है— क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र और निरूद्ब । चित के डाँवाडोल रहने को क्षिप्तावस्था, कर्तव्याकर्तव्य ज्ञानशून्य होने को मुढा़वस्था, चंचलता के बीच बीच में चित्त की स्थिरता को विक्षिप्तावस्था, और एक वस्तु पर निश्चल रूप से स्थिर होने को एकाग्रावस्था कहते है । एकाग्र के उपरांत फिर निरूद्घ अवस्था की प्राप्ति होती है जिसमें स्थिर होने के लिये किसी वस्तु के आलंबन की आवश्यकता नहीं होती, चित्त अपनी प्रकृति में ही स्थिर हो जाता है ।