निर्गुण्ड़ी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]निर्गुंड़ी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ निर्गुण्ड़ी] एक प्रकार का क्षुप । संभालू । सम्हालु । सिंदुवार । विशेष— इसके प्रत्येक सोके में अरहर को पत्तियों के समान पाँच पाँच पत्तियाँ होती है । जिनका ऊपरी भाग नीला और नीचे का भाग सफेद होता है । इसकी अनेक जातियाँ है । किसी में काले और किसी में सफेद फूल लगते हैं । फूल आम के बौर के समान मंजरी के रूप में लगते है और केसरिया रंग के होती है । वैद्यक में इसे स्मरणशक्ति वर्धक, गरम, रुखी, कसैली, चरपरी, हलकी, नेत्रों के लिये हितकारी तथा शूल, सूजन, आमवात, कृमि, प्रदर, कोढ़, अरुचि, कफ और ज्वर के दूर करनेवाली माना है । औषधियों में इसकी जड़ का व्यवहार होता है । पर्या॰—नीलिका । नीलिनिगुंड़ी । सिंदुक । निलसिंदुक । पीतसहा । भूतकेशी । इंद्रोणी । कपिका । शोफालिका । शीतभीरू । नीलमंजरी । बनज । मरूत्पुत्री । कर्तरीपत्रा । इंद्राणिका । सिंदुवार ।