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निवृत्तसन्तापनीय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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निवृत्तसंतापनीय संज्ञा पुं॰ [सं॰] सुश्रुत के अनुसार एक रसायन जिसमें अठारह ओषधियाँ हैं । विशेष—कहते हैं, इस रसायन के सेवन से मनुष्य का शरीर युवा के समान और बल सिंह के समान हो जाता है और वह मनुष्य श्रुतिधर हो जाता है । ये सब ओषधियाँ सोमरस के समान वीर्ययुक्त मानी जाती हैं । इनके नाम ये हैं—अजगरी, श्वेतकपोती, कृष्णकपोती, गोनसी, वाराही, कन्या, छत्रा, करेणु, अजा, चक्रका, आदित्यवर्णिनी, ब्रह्मसुवर्चला, श्रावणी, महाश्रावंणी, गोलोमी, अजलोमी और महावेगवती ।