निशान

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

निशान ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] तेज करना । सान पर चढ़ाना । यौ॰—निशानपट्ट = सान धरने का पत्थर ।

निशान ^२ संज्ञा पुं॰ [फा॰]

१. लक्षण जिससे कोई चीज पहचानी जाय । चिह्न । जैसे,—(क) उस मकान का कोई निशान बता दो तो जल्दी पता लग जायगा । (ख) जहाँ तक पुस्तक पढ़ो उसके आगे कोई निशान रख दो ।

२. किसी पदार्थ से अंकित किया हुआ अथवा और किसी प्रकार बना हुआ चिह्व । जैसे, पैर का निशान, अँगूठे का निशान, ध्वनिथों की पहचान के लिये बनाए हुए निशान (अक्षर), किताव पर बनाए हुए निशान आदि । क्रि॰ प्र॰—करना ।—डालना ।—लगाना ।—बनाना ।

३. शरीर अथवा और किसी पदार्थ पर बना हुआ स्वाभाविक या और किसी प्रकार का चिह्न, दाग या धब्बा । जैसे, किसी पशु पर बना हुआ गुल का निशान, चेहरे पर बना हुआ गुम्मर का निशान ।

४. किसी पदार्थ का परिचय करने के लिये उसके स्थान पर बनाया हुआ कोई चिह्न । जैसे, ज्योतिष में ग्रहों आदि के बनाए हुए निशान, वनस्पति शास्त्र में वृक्ष, झाड़ी और नर या मादा पेड़ या फूल के लिये बनाए हुए निशान ।

५. वह चिह्न जो अपढ़ आदमी अपने हस्ताक्षर के बदले में किसी कागज आदि पर बनाता है ।

६. वह लक्षण या चिह्न जिससे किसी प्राचीन या पहले की घटना अथवा पदार्थ का परिचय मिले । जैसे, किसी पुराने नगर आदि का खंडहर । यौ॰—नाम निशान = (१) किसी प्रकार का चिह्न या लक्षण । (२) अस्तित्व का लेश । बचा हुआ थोड़ा अंश । जैसे,—वहाँ अब किसी घर का नाम निशान नहीं है ।

७. पता । ठिकाना । मुहा॰—निशान देना = (१) पता बताना । (२) आसामी को सम्मन आदि तामील करने के लिये पहुचनवाना । यौ॰—निशानदेही ।

८. वह चिह्न या संकेत जो किसी विशेष कार्य या पहचान के लिये नियत किया जाय ।

९. समुद्र में या पहाड़ों आदि पर बना हुआ वह स्थान जहाँ लोगों की मार्ग आदि दिखाने के लिये कोई प्रयोग किया जाता है । जैसे, मार्गदर्शक प्रकशालय आदि (लश॰) ।

१०. दे॰ 'लक्षण' ।

११. दे॰ 'निशाना' ।

१२. दे॰ 'निशानी' ।

१३. ध्वजा । पताका । झंड़ा । मुहा॰—किसी बात का निशान उठाना या खड़ा करना = (१) किसी काम में अगुआ या नेता बनकर लोगों को अपना अनुयायी बनाना । जैसे, बगावत का निशान खड़ा करना । (२) आंदोलन करना ।