निहोरना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]निहोरना क्रि॰ स॰ [सं॰ मनोहार, हिं॰ मनुहार]
१. प्रार्थना करना । विनय करना । उ॰—(क) सुमिरि महेशहि कहइ निहोरी । विनती सुनहु सदा शिव मोरी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) पुरजन परिजन सकल निहोरी । तात सुनाएहु बिनती मोरी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) तापस बेष गात कृस जपत निरंतर मोहिं । देखउँ बेगि सो जतन करु सखा निहोरउँ तोहि ।
२. मनाना । मनौती करना । उ॰—(क) देवता निहोरि महामारिन ते कर जोरे, भोरानाथ भोरे अपनी सी कहि ठई है ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) ग्वालिन चली जमुन बहोरि । वाहि सब मिलि कहत आवहु कछू कहति निहोरि ।—सूर (शब्द॰) । (ग) जोरहु हुंकर भोरे से भाय निहोरत प्यारे पिया बड़भागी ।—(शब्द॰) । (घ) है तो भली घर ही जो रहो तुम यों कहि के ननदी हूँ निहोरेउ ।—(शब्द॰) ।
३. कृतज्ञ होना । एहसान लेना । उ॰—सोइ कृपाल केवटहि निहोरे । जेहि जग किय तिहु पग ते थोरे ।—तुलसी (शब्द॰) ।