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नीठि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नीठि ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अनिष्टि, प्रा॰ अनिट्ठि] अरुचि । अनिच्छा । मुहा॰—नीठि नीठि करके = (१) ज्यों त्यों करके । बहुत इधर उधर करके । किसी न किसी प्रकार । उ॰—नीठि नीठि करि चित्र मंदिर लौं आई बाल चहूँ ओर चाहि कछु चेति कै भजै लगो ।—बेनी (शब्द॰) । (२) कठिनता से । मुश्किल से । उ॰—छूटी लट लट़कति कटि तट लौं चितवति नीठि नीठि करि ठाढ़ी ।—केशव (शब्द॰) ।

नीठि ^२ क्रि॰ वि॰

१. ज्यों त्यों करके । किसी न किसी प्रकार । उ॰—आई संग आलिन के ननद पठाई नीठि सोहत सुहाई सूही इंड़री सुपट की । कहँ पदमाकर गभीर जमुना के तीर लागी घट भरन नवेली नेह अटकी ।—पद्माकर (शब्द॰) ।

२. मुश्किल से । कठिनता से । उ॰—(क) चहुँ और चितै संत्रास । अवलोकियो आकास । तहँ शाख बैठो नीठि । तब पर् यो वानर दीठि ।—केशव (शब्द॰) । (ख) ऐसी सोच सीठी सीठी चीठी अलि दीठी, सुनै मीठी मीठी बातन जो नीके हू मैं नीठि है ।—केशब (शब्द॰) । (ग) करके मीड़े कुसुन लौं गई विरह कुम्हिलाय । सदा समीपिन सखिन हूँ नीठि पिछानी जाय ।—बिहारी (शब्द॰) । (घ) चको जकी सी ह्वै रही बूझे बोलति नीठि । कहूँ दीठि लागी लगी, कै काहू की दीठि ।—बिहारी (शब्द॰) । यौ॰—नीठि नीठि = ज्यों त्यों करके । किसी न किसी प्रकार । जैसे तैसे । मुश्किल से । कठिनता से । उ॰—(क) नीठि नीठि उठि बैठि हू पिय प्यारी परभात । दोऊ नींद भरे खरे गरे लागि गिरि जात ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) भौंह उँच ै आँचर उलटि मोरि मोरि मुँह मोरि । नीठि नीठि भीतर गई दीठि दीठि सों जोरि ।—बिहारी (शब्द॰) ।