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नीलचक्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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नीलचक्र संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. जगन्नाथ जी के मंदिर के शिखर पर माना जानेवाला चक्र ।

२. एक दंडक वृत्त जो ३० अक्षरों का होता है और अशोक पुष्प मंजरी का एक भेद है । इसमें 'गुरु लघु' १५ बार क्रम से आते हैं । यथा,—जानि कै समै भुवाल राम राज साज साजि ता समै अकाज काज कैकई जु कीन ।