नेग
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]नेग संज्ञा पुं॰ [सं॰ नैयमिक, हिं॰ नेवग]
१. विवाह आदि शुभ अवसरों पर संबंधियों, आश्रितों तथा कार्य या कृत्य में योग देनेवाली और लोगों को कुछ दिए जाने का नियम । देने, पाने का हक या दस्तूर । जैसे,—नेग में उनको बहुत कुछ मिला । यौ॰—नेगचार । नेगजोग । मुहा॰—नेग करना = शुभ मुहूर्त में आरंभ करना । साइत करना ।
२. वह वस्तु या धन जो विवाह आदि शुभ अवसरों पर संबंधियों, नौकरों चाकरों तथा नाई बारी आदि काम करनेवालों को उनकी प्रसन्नता के लिये नियमानुसार दिया जाता है । बँधा हुआ पुरस्कार । इनाम । बखशिश । उ॰—लाख टका अरु झूमका (देहु) सारी दाइ कौं नेग ।—सूर॰, १० । ४० । क्रि॰ प्र॰—चुकाना ।—देना । मुहा॰—नेग लगना = (१) पुरस्कार देना आवश्यक होना । रीति के अनुसार कुछ देना जरूरी होना । जैसे,—यहाँ (५०) नेग लगेगा । (२) हीले लगना । काम में आ जाना । सार्थक होना । सफल होना ।