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न्याव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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न्याव संज्ञा पुं॰ [सं॰ न्याय]

१. नियम नीति । आचरण । पद्धति । उ॰—ऊधो, ताको न्याव है जाहि न सूझै नैन ।—सूर (शब्द॰) ।

२. उचित पक्ष । वाजिब बात । कर्तव्य का ठीक निर्वारण ।

३. विवेक । उचित अनुचित की बुद्धि । इंसाफ । जैसे,—जो तुह्मारे न्याव में आवे वही करो ।

४. दो पक्षों के बीच निर्णय । विवाद वा झगडे़ का निबटेरा । व्यवहार या मुकद्दमे का फैसला । जैसे—राजा करे सो न्याव । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना । मुहा॰—न्याव चुकाना = झगडा़ निबटाना । विवाद का निर्णय करना । फैसला करना ।