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पंचसूना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पंचसूना संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पञ्चसूना] मनु के अनुसार पाँच प्रकार की हिंसा जो गृहस्थों से गृहकार्य करने में होती है । वे पाँच काम जिनके करने में छोटे छोटे जीवों की हिंसा होती है । विशेष—वे पाँच काम ये हैं—चूल्हा जलाना, आटा आदि पीसना, झाड़ू देना, कूटना और पानी का घड़ा रखना । इन्हें मनु न े चुल्ली, पेषणी, उपस्कर, कंडनी और उद्कुंभ लिखा है । इन्हीं पाँच प्रकार की हिसाओं के दोषों की निवृत्ति के लिये पंचमहायज्ञों का विधान किया गया है । दे॰ 'पंचमहायज्ञ' ।