पंचौली
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पंचौली ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पञ्च + आवलि] एक पौधा जो पश्चिम भारत, मध्यप्रदेश, बंबई और बरार में मिलता है । पंचपात । पंचपानड़ी । विशेष—इसकी पत्तियों और डंठलों से एक प्रकार का सुगंधित तेल निकलता है जिसका व्यवहार यूरोप के देशों में होता है । इसकी खेती पान के भीटों में की जाती है । पौधे दो दो फुट की दूरी पर लगाए जाते हैं । एक बार के लगाए हुए पौधों से दो बार छह छह महीने पर फसल काटी जाती हैं । दूसरी फसल कट जाने पर पौधे खोदकर फेंक दिए जाते हैं । डंठल सूख जाने पर बड़े बड़े गट्ठों में बाँधकर बिक्री के लिये भेज दिए जाते हैं । इन डंठलों से भबके द्वारा तेल निकाला जाता हैं । ६६ सेर लकड़ी से लगभग बारह से पंद्रह सेर तक तेल निकलता है । यूरोप में इस तेल का व्यवहार सुगंध द्रव्य की भाँति होता है । इसे 'पंचपात' और 'पंचपानड़ी' भी कहते हैं ।
पंचौली ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पञ्चकुल, पञ्चकुली] वंशपरंपरा से चली आती हुई एक उपाधि । विशेष—प्राचीन समय में किसी नगर या गाँव में व्यवस्था रखने और छोटे मोटे झगड़ों को निपटाने के लिये पाँच प्रतिष्ठित कुल के लोग चुन जाते थे जो 'पंच' कहलाते थे ।