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पगना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पगना क्रि॰ स॰ [सं॰ पाक]

१. शरबत या शीरे में इस प्रकार पकना कि शीरा चारो ओर लिपटः और घुस जाय । रस के साथ परिपक्व होकर मिलना । जैसे, पेठे का चीनी में पगना

२. किसी लसलसे पदार्थ के साथ इस प्रकार मिलना कि वह उसमें भर जाय । सनना । रस आदि के साथ ओतप्रोत होना ।

३. बहुत अधिक अनुरक्त होना । किसी के प्रेम में डूबना । मग्न होना । उ॰—कहैं पद्माकर पगी यों पतिप्रेम ही में, पदमिनी तोसी, तिया तोही पेखियत है ।पद्माकर (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—जाना ।